Soulgasm

To Quill the Mocking World

वजूद

शांतनु जैन
(3 मिनट)

और तब –
तब लगता है , मानो –
तू है !

Advertisements
December 19, 2015 · 1 Comment

तक़दीर

शांतनु जैन
(5 मिनट)

राह चलते हुए ,
बहुत सोच समझकर ,
ध्यान से –
पाँव रखता हूँ !

November 14, 2015 · 2 Comments

मणिकरण

शांतनु जैन
(5 मिनट)

बरबस ही नज़र पड़ गई उस पहाड़ की फुनगी पर ! कुछ … न, पूरी धुंधली – सी थी जब सो कर उठा। और अब, चमक रही थी उषा की उस लालिमा में।

October 24, 2015 · 2 Comments

आधी अधूरी तमन्नायें

शांतनु जैन
(5 मिनट)

वहां …
… जहाँ सिर्फ ‘मैं’ हूँ ,
न कोई बंधन , न कोई राग !

October 10, 2015 · 1 Comment

खोया खोया चाँद

By Shantanu Jain.

आज फिर,

अपने नीड़ को जाती गौरैया –

– चहचहाना भूल गयी !

August 1, 2015 · 2 Comments

उस रात की बात !

By Shantanu Jain

आज की शब कुछ अलग सी थी …

कुछ सकुचाई – सी … कुछ अलसाई – सी …

June 20, 2015 · 4 Comments

तेरी परिभाषा

By Shantanu Jain

Reminiscences From My Diary …

कभी मस्जिद से आती अजान की आवाज़ है वह ,

वही मंदिर का शंख भी !

June 6, 2015 · 7 Comments

कांच के उस पार …

Reminiscences from my diary
By Shantanu Jain

मेरे और सलिल में , बस …
काँच भर का फासला था !

एक ओर , मैं –
औपचारिकता के लिबास में लिपटा –
सभ्यता का मुखौटा लगाए –
बैठा हुआ था –

May 16, 2015 · 12 Comments

Blog Stats

  • 93,076 times visited

Top Rated