Soulgasm

To Quill the Mocking World

अच्छा लगता है

Poetry, Minakhi Misra
(3 min read)

सालों बाद घर वापस आना अच्छा लगता है।
काएं-काएं करती उस दरवाज़े से फिर गुज़र जाना अच्छा लगता है।

March 11, 2017 · Leave a comment

कूप-समाधि

Poetry, Minakhi Misra
(3 min read)
कौन होगा ऐसा
जो आँखों की तरपौलिन हटा कर
मेरे मन में झाँक सकेगा?

February 25, 2017 · 4 Comments

डब्बे

Poetry, Minakhi Misra
2 min read

जाने का वक़्त आया तो समझ नहीं आ रहा था
क्या लूँ और क्या छोड़ जाऊं।
चार सालों का बोझ महसूस हो रहा था दिल पर।
कपडे तक कफ़न लग रहे थे।

February 11, 2017 · 1 Comment

जवाब-तलाशी

Poetry, Minakhi Misra
2 min read

कुछ जवाब किताबों में ढूंढता था पहले…
अब लगता है आपकी बातों में ही मिल जाएँगी वह सब।

February 4, 2017 · 2 Comments

ट्रैन की खिड़की

Poetry, Minakhi Misra
(2 min read)

नींद का बोझ मुश्किल से संभाल रहा हूँ।
खुदसे नज़र मिलाने के लिए भी तो
पलकों का भर उठाना पड़ता है।

November 26, 2016 · 1 Comment

क्यों याद आते हो?

Poetry, Minakhi Misra
(3 min read)

क्यों याद आते हो बत्ती बुझाता हूँ जब
रूम फ्रेशनर की खुसबू में क्यों याद आते हो?

November 13, 2016 · 2 Comments

विरासत

Minakhi Misra
(3 min read)

पच्चीस का होने वाला हूँ।
बालों में अब चांदी आने लगी है।

October 1, 2016 · 3 Comments

Blog Stats

  • 99,704 times visited

Top Rated