Soulgasm

To Quill the Mocking World

कौन रोकता है

दिव्य
(3 मिनट )

कोशिश होती है रोकने की
बहते दरिया को
बैठे समंदर को बैठने से
कौन रोकता है

March 11, 2017 · Leave a comment

ध्यान से उतरें

Divya Soni
(3 min read)

आँखें जमी
अड़ी
मोबाइल की स्क्रीन पर
खुदके
दूसरों के

October 15, 2016 · Leave a comment

न मैं उस से

Poetry, Divya Soni
(4 min read)

न मुझसे प्यार करती है वो अब
न मैं उस से।
न मेरे बारे में सोचती है
न मैं उसके।

June 18, 2016 · 2 Comments

खोज

दिव्य
(3 मिनट )

जो भी मिले
और जैसे भी,
न समझे तुझे
कोई कैसे भी

May 28, 2016 · 2 Comments

5 रूपए की कैंडी

Poetry, Divya Soni
(3 min read)

हर आइस क्रीम
मिलती है उसके पास
5 रूपए की कैंडी
और 300 का पैक

May 6, 2016 · 2 Comments

कौन सोचे

Poetry, दिव्य सोनी
(3 मिनट)

अगर सोचो इसे
रंगमंच सी
हम खिलौने
खेलकार कोई और

March 26, 2016 · Leave a comment

हम

Poetry, दिव्य सोनी
(3 मिनट)

फिर न जाने किसकी
तलाश में निकलते हैं
बदहवास बेसुध
भागते रहते हैं

February 20, 2016 · Leave a comment

कोई कभी

दिव्य सोनी
(3 मिनट)

अब सोचता हूँ
ये पिटारा तुम्हें ही दे दूँ,
और तुम अनकही बातें पूरी कर दो!

January 15, 2016 · 3 Comments

दिया लाओ

दिव्य सोनी
(3 मिनट)

ये पंक्तियाँ उलझ गई थी
बीते बरस
सुलझा लेते हैं।

January 2, 2016 · Leave a comment

सम्भ्रम

दिव्य सोनी
(3 मिनट)

ज़िन्दगी में अलविदा कहना
किसे और कब
ये पल दो पल के रिश्ते हैं
या पल दो पल के हम

November 21, 2015 · 2 Comments

प्रणय

दिव्य सोनी
(3 मिनट)

अब मान गया सिंधु तो लेकिन
बूँदें सब नाराज़ हुई
हमें याद धरा की आएगी
लहरों में कुछ कुछ बात हुई।

October 24, 2015 · 5 Comments

आखिरी पन्ना

दिव्य सोनी
(3 मिनट )

सारी ज़रूरी बातें लम्हों की
यहीं लिखी है पन्ने में
मुद्दतों बाद पढ़ना
जी लेना सदियाँ लम्हों में

September 19, 2015 · 3 Comments

ना है दिल चाँद सा

दिव्य सोनी
(3 मिनट)

कि तब ये चाँदनी भी तुम ही हो
मावस की रातें भी।
कि तब तो ‘चाँद-सूरज’ नाम लेंगी
ये किताबें भी।

September 5, 2015 · 2 Comments

मैं नहीं लौटाऊंगी

दिव्य सोनी

पर ये जो अल्फाज़ हैं ना

मुड़े तुड़े

यहीं कहीं बिखरे हुए

इन्हें रहने दो मेरे पास

मैं नहीं लौटाउंगी

August 14, 2015 · 1 Comment

मेरे कुछ अल्फाज़

By Divya Soni.

मेरे कुछ अल्फाज़
मुड़े तुड़े पड़े हैं
उन पुराने खतों में तुम्हारे पास
ऐसा करो,
आज लौटा ही दो |

August 1, 2015 · 1 Comment

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