Soulgasm

To Quill the Mocking World

मेरा कर्म

By Abhishek Yadav
(3 min read)

हे प्रेम , मुझे कमजोर, रणछोड़क मत कहना ,
ह्रदय विदारक , भाव विनाशक मत समझना

April 9, 2016 · Leave a comment

मेरी ज़रूरतें

By अभिषेक यादव
(3 मिनट)

दो वक़्त की रोटी ,कुछ जोड़ी कपडे और सर पर एक छत,
यही तो ज़रूरत होती है ,
मुझ जैसे इंसान की!

March 5, 2016 · Leave a comment

पुस्तैनी घर

अभिषेक यादव
(३ मिनट)

बड़ी जद्दोजहद के बाद , अपनी पुस्तैनी ज़मीं पर पैर रखे ,

कुछ झीज़कते , कुछ हिचकिचाते

December 26, 2015 · Leave a comment

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