Soulgasm

To Quill the Mocking World

कौन रोकता है

दिव्य
(3 मिनट )

कोशिश होती है रोकने की
बहते दरिया को
बैठे समंदर को बैठने से
कौन रोकता है

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March 11, 2017 · Leave a comment

नए रास्ते

Poetry, Arpit Arya
(3 min read)
होती है बेचैनी इस कदर कभी कभी की ,
रुक जाता था कहीं , थम जाता था कभी

February 25, 2017 · 2 Comments

कूप-समाधि

Poetry, Minakhi Misra
(3 min read)
कौन होगा ऐसा
जो आँखों की तरपौलिन हटा कर
मेरे मन में झाँक सकेगा?

February 25, 2017 · 4 Comments

‘गर तू मेरा शिवालय बन जाए …

Poetry, Shantanu Jain
(3 min read)

प्रेम सिंधु का तुझसे आदि,
तू गोधूलि, तू ही निशांत।

February 25, 2017 · 4 Comments

डब्बे

Poetry, Minakhi Misra
2 min read

जाने का वक़्त आया तो समझ नहीं आ रहा था
क्या लूँ और क्या छोड़ जाऊं।
चार सालों का बोझ महसूस हो रहा था दिल पर।
कपडे तक कफ़न लग रहे थे।

February 11, 2017 · 1 Comment

जवाब-तलाशी

Poetry, Minakhi Misra
2 min read

कुछ जवाब किताबों में ढूंढता था पहले…
अब लगता है आपकी बातों में ही मिल जाएँगी वह सब।

February 4, 2017 · 2 Comments

न तुम मुस्कुराते, न यह बात होती

Poetry, Atul Shukla
(3 min read)

तुझे याद करके जो आँखें न रोती,
तो आज इनमें इतनी चमक न होती

January 22, 2017 · 2 Comments

अल्मोड़ा

Non-fiction, Shantanu Jain
(5 min read)
‘सन्नाटा’ शब्द मेरे लिए भयावहता का शब्द-चिह्न है और ‘शांति’ मेरे लिए सुकून का पर्याय है

December 25, 2016 · 9 Comments

बारिश

Poetry, Deepak Singh
(3 min read)
ना जाने कितनी कागज़ की नावें तैरी होंगी,
ना जाने कितने जहाज़ डूबे होंगे;
इस बारिश में ।।

December 10, 2016 · 6 Comments

ट्रैन की खिड़की

Poetry, Minakhi Misra
(2 min read)

नींद का बोझ मुश्किल से संभाल रहा हूँ।
खुदसे नज़र मिलाने के लिए भी तो
पलकों का भर उठाना पड़ता है।

November 26, 2016 · 1 Comment

लैंप बुझ चुका है

Poetry, Utkarsh Tripathi
(3 min read)

जो आ जाया करती थी कभी भूल से
काफी दिन हो गए सिरहाने के कवर बदले भी

November 13, 2016 · 4 Comments

क्यों याद आते हो?

Poetry, Minakhi Misra
(3 min read)

क्यों याद आते हो बत्ती बुझाता हूँ जब
रूम फ्रेशनर की खुसबू में क्यों याद आते हो?

November 13, 2016 · 2 Comments

ध्यान से उतरें

Divya Soni
(3 min read)

आँखें जमी
अड़ी
मोबाइल की स्क्रीन पर
खुदके
दूसरों के

October 15, 2016 · Leave a comment

मेरे मन को एक – तलकनामा

By Anchita Bubna
(5 min read)

ख़ामोशी भरे लफ़्ज़ों को
आंसू में बहाने को जी करता है,
टूटने को जी करता है,
हारने को जी करता है ….

October 15, 2016 · 1 Comment

विरासत

Minakhi Misra
(3 min read)

पच्चीस का होने वाला हूँ।
बालों में अब चांदी आने लगी है।

October 1, 2016 · 3 Comments

नैनों से कितना बरसेगा ये अम्बर

‘सुमन’
(3 मिनट)

नैनों से कितना बरसेगा ये अम्बर
डूब न जाये अपने ख्वाबों का घर

September 17, 2016 · 2 Comments

गली खत्रियान , अबुपुरा , मुज़फ्फरनगर

शांतनु जैन
(3 मिनट) खुला आँगन , खुले आँगन में पसरी धूप , एक कोने में ऐंठा – सा खड़ा हरे रंग का हैंडपंप, बाईं ओर से ऊपर जाने वाला चौड़ा जीना, उस चौड़े जीने की गहरी लाल सीढ़ियां और ….

September 17, 2016 · 1 Comment

कभी

Prashant Suman
(3 min read)

तब, जब अठ्न्नी में भी
दुकानदार टाफी दिया करता था,
हाँ, मेरी अमीरी का दौर था

September 3, 2016 · 1 Comment

तुम्हारी मेरी दोस्ती

Poetry, Aditya Shubham
(3 min read)

हम-तुम काफी chill हैं
लेकिन तुम ध्यान रखना
हमारे बीच कोई Thermostat न हो जो बीच की गर्मी माप रहा हो

July 2, 2016 · 1 Comment

बड़ी बात, छोटी चीज़ें

Poetry, Shorya Mittal
(3 min read)

मुझे छोटी छोटी चीज़ों पर ध्यान देने की आदत है,
जैसे वो इनवरटेड कोमा की जोड़ी
जो फुदक फुदक कर वही बात चिल्लाए जा रही है.

July 2, 2016 · Leave a comment

एक अलग घर

Poetry, Deepak Singh
(3 min read)

खड़ी करते हैं दीवारें,
हिम्मत की |
रंगते हैं दीवारों को,
सपनों से |

July 2, 2016 · 4 Comments

निशाचरणी

Poetry, Shantanu Jain
(3 min read)

स्वप्न – लोक में हृदय नहीं रमता –
पर तुम ब्रह्माण्ड तरा जाती।
तुम अभिरामि , तुमको मैं निहारूँ –
ऐसा सम्मोहित कर जाती।

June 25, 2016 · 6 Comments

न मैं उस से

Poetry, Divya Soni
(4 min read)

न मुझसे प्यार करती है वो अब
न मैं उस से।
न मेरे बारे में सोचती है
न मैं उसके।

June 18, 2016 · 2 Comments

गुलाब ! तुम प्रेरणा हो ।

Poetry, Sunita Chaudhary
(3 min read)

सुख तो क्षणिक है,दुःख ही आजीवन साथी है,
जीवन असत्य है,मृत्यु ही है केवल सत्य ।

June 18, 2016 · 1 Comment

बुलबुले

Non fiction, Deepak Singh
(4 min read)

बुलबुले समझते हो ना ?
जो झाग के साथ उठते हैं, अपने में समेटे हुए एक छोटा सा इंद्र-धनुष, अपनी सी ही एक छटा लिए हुए |

June 18, 2016 · 4 Comments

काश मैं तुमसे कह पाती माँ

सुनीता चौधरी
(3 मिनट )

पर अवश, थकी-थकी सी लगती है माँ
सब बोलते हैं, वह मौन रहती है

June 11, 2016 · 8 Comments

असमंजस

Ritu Poddar
(3 min read)

जो मिला वो चाहिए नहीं
क्या चाहिए ये पता नहीं
पता अगर है मिला नहीं
मिला अगर तो बहुत नहीं

May 28, 2016 · 4 Comments

खोज

दिव्य
(3 मिनट )

जो भी मिले
और जैसे भी,
न समझे तुझे
कोई कैसे भी

May 28, 2016 · 2 Comments

सपनो की उधेड़बुन

Poetry, Ritu Poddar
(3 min read)

रंग बदल के लाई हूँ, पिछ्लो से कुछ बना नहीं…
बैठी देर सब काम छोड़, पर एक सिरा भी जुड़ा नहीं…

May 13, 2016 · 4 Comments

5 रूपए की कैंडी

Poetry, Divya Soni
(3 min read)

हर आइस क्रीम
मिलती है उसके पास
5 रूपए की कैंडी
और 300 का पैक

May 6, 2016 · 2 Comments

मैं लिखता क्यों हूँ

Non-fiction, Shantanu Jain
(5 min read)

मन की सुनूँ और सुनकर गौर करूँ तो पाता हूँ कि जहाँ तक मेरी बात है, मैं तब लिख पाता हूँ जब हृदय की आर्द्रता अपने गागर को पार कर जाती है।

May 6, 2016 · 1 Comment

बाज़ी किस्मत की

Poetry, Utkarsh Tripathi
(3 min read)

ना दे पाया लाल को अपने,
जो खिलौना गाड़ी मांगी थी।
क्या करता ज़मीन थी बंजर,
किस्मत ही साली बाग़ी थी।

April 30, 2016 · 1 Comment

ये हौज़ खास

अमित सैनी
(3 मिनट)

ये किला लाल, ये फूल कमल का,
ये लुटयंस के बंगलो,
ये हुमायूं का मकबरा,
ये महरौली से जाती हुई सड़कें,

April 16, 2016 · 1 Comment

From School Dairy – आख़िरी पैगाम

Poetry, Mani Mahesh
(3 min read)

आज शाम फिर एक पैगाम लाई है
ये गुमनाम हवा किसी का नाम लाई है

April 16, 2016 · Leave a comment

मेरा कर्म

By Abhishek Yadav
(3 min read)

हे प्रेम , मुझे कमजोर, रणछोड़क मत कहना ,
ह्रदय विदारक , भाव विनाशक मत समझना

April 9, 2016 · Leave a comment

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