Soulgasm

To Quill the Mocking World

न तुम मुस्कुराते, न यह बात होती


Atul Shukla
(3 min read)

tenerportada

न तुम मुस्कुराते, न यह बात होती,

कड़ी धुप में न ये बरसात होती,

ज़िन्दगी में न जो यह शुरुआत होती,

तो जीने में कहाँ ये बात होती

तुझे याद करके जो आँखें न रोती,

तो आज इनमें इतनी चमक न होती,

तस्वीर तेरी जो इनमें न होती,

जगती ही रहती यह आँखें न सोती

दामन में हैं तेरी यादों के मोती

सांसें मेरी उन्हें पल पल पिरोती

तन्हाई में तुझसे चुपके से बातें होती

मैं सो भी जाऊं पर बातें न सोती

अब तोह दर्द और चाहत में फ़र्क़ नाज़ आता ही नहीं,

एक मीठा घाव है जिसका असर जाता ही नहीं,

बेसब्री इतनी है के डर है दिल के बंद हो जाने का,

धड़कनों का जैसे अरमान हो आसमां छू कर आने का

बस कोई जादू की छड़ी घूम जाए

और तू मेरी दुनिया में आ जाए

एक बार जो तू मुझे गले लगाए,

इस बेसब्री को थोड़ा सुकून आ जाए

दिल का क्या है, ख्याल बना के खुश हो लेता है,

पर असली दुनिया का सच मुझे सज़ा देता है

कश्मकश बस यही हरदम होती

के न तुम मुस्कुराते और न ये बात होती..

कड़ी धुप में न ये बरसात होती…


Picture Credits

Atul Shukla is a Guest Author at Soulgasm.

(Click here to read our first book “Mirrored Spaces” : A poetry and art anthology in English and Hindi with contributions from 22 artists)

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2 comments on “न तुम मुस्कुराते, न यह बात होती

  1. ritujasingh
    January 22, 2017

    खूब

    Liked by 1 person

  2. Sachin patel
    February 4, 2017

    😍😍😍😍😍💕💕💕💕💕💕💓💓💓💓💓💖💖💖💖💖💗💗💗💗💗💗💝💝💝💝💝💝💝💝💟💟💟💟💟💟

    Liked by 1 person

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This entry was posted on January 22, 2017 by in Hindi, Poetry and tagged .

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