Soulgasm

To Quill the Mocking World

क्यों याद आते हो?


Minakhi Misra
(3 min read)

theordinarylovely-unmadebed

शाम मसरूफियत की टाई उतारता हूँ जब
सुबह इस्त्री के धुंए में क्यों याद आते हो?
चिपकती कमीज को खूंटी पे टंगाता हूँ जब
हवा पंखे की छुएं में क्यों याद आते हो?

क्यों याद आते हो दाल पकाता हूँ जब
मिसमैच्ड कटलरी में क्यों याद आते हो?
अटके गले से हिचकियाँ लेता हूँ जब
बोतल बिसलेरी में क्यों याद आते हो?

क्यों याद आते हो कोल्ड ड्रिंक मंगाता हूँ जब
लौटे छुट्टे की नोट में क्यों याद आते हो?
तुमसे ध्यान भटकाने टीवी चलाता हूँ जब
छिपे सोफे की रिमोट में क्यों याद आते हो?

क्यों याद आते हो बत्ती बुझाता हूँ जब
रूम फ्रेशनर की खुसबू में क्यों याद आते हो?
तने नसों को ढकने चद्दर ओढ़ता हूँ जब
ज़मीर से गुफ़्तगू में क्यों याद आते हो?

क्यों याद आते हो पलके झपकाता हूँ जब
रोशन किंडल के टच में क्यों याद आते हो?
तुमबिन कईं रातें यूँ कटा चूका हूँ जब
अब भी यार, सच में, क्यों याद आते हो?


Picture Credits

Minakhi is a core team author at Soulgasm.

(Click here to read our first book “Mirrored Spaces” : A poetry and art anthology in English and Hindi with contributions from 22 artists)

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2 comments on “क्यों याद आते हो?

  1. sonidivya
    November 20, 2016

    How slowly the love from first line turned into frustration in the last, totally relatable.

    Like

  2. utk.arsh
    November 23, 2016

    This is nice

    Like

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This entry was posted on November 13, 2016 by in Hindi, Poetry and tagged .

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