Soulgasm

To Quill the Mocking World

माँ ….कभी-कभी सपनो में आ जाया कर


अतुल शुक्ला
(3 मिनट)

कल तेरे नाम का एक दिन मनाया दुनिया ने

जाने क्या क्या तेरे बारे में जताया दुनिया ने

पूरे दिन सोचता रहा मैं, अपनी बात तुझ तक पहुचाऊं कैसे

दिल की ये फ़रियाद आसमान तक ले जाऊँ कैसे 

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कैसे कहूँ कि बिन तेरे जीना कैसा है

कैसे कहूँ कि बिन तेरे घर का आलम कैसा है

कैसे कहूँ कि घर का हर कोना तेरी याद दिलाता है

कैसे कहूँ कि घर का हर कोना तुझे बुलाता है

 

फिर से उन्ही ठन्डे हाथों से तू मुझे जगाएगी

इसी इंतज़ार में नींद से सौदा करता रहता हूँ,

आँचल से मेरे माथे का पसीना पोंछ जाएगी

इसी इंतज़ार में ज़िन्दगी से लड़ता रहता हूँ

 

घर से निकलते हुए रोज़ तेरे कमरे में जाता हूँ मैं

तेरी तस्वीर को छू कर चला जाता हूँ मैं

लगता है काश ये सब किसी बुरे सपने सा बीत जाए

और जब मैं कमरे में जाऊँ तो तू नज़र आये

 

जाने कैसी कमी है ये तेरी कि

हर पल याद आती है तू

जश्न की बात हो या ग़म हो

दोनों में रुला जाती है तू

 

लोग कहते हैं कि वक़्त के साथ हर याद धुंधली हो जाती है

वक़्त के साथ दर्द की हर बयार हल्की हो जाती है

या तो वक़्त नहीं गुज़रा जब से तू गयी है या दुनिया झूठी है

क्यूंकि जब से तू गयी मुझसे हर ख़ुशी रूठी है

 

मालूम है मुझे मेरा ये इंतज़ार ख़त्म नहीं होगा

मुझे हर हाल में इसके साथ ही जीना है

 

बस इतना कहना था तुझसे कि मेरी चिंता मत करना

तेरी दुआओं के असर से ठीक हूँ मैं

हासिल एक दिन कर ही लूँगा मुकाम अपना

तू तो जानती है कितना ढीठ हूँ मैं

 

बड़ा दिल करता है तुझे देखने का

बस इतना सा एहसान मुझपे कर

असली दुनिया पे तो तेरा बस नहीं

कभी कभी सपनों में ही आ जाया कर

———————————–

(Image credits: Priyanka’s Photography)

(Atul is a guest author at Soulgasm)

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6 comments on “माँ ….कभी-कभी सपनो में आ जाया कर

  1. Shantanu Jain
    April 2, 2016

    i cried, and i cried a lot!

    Liked by 1 person

  2. Rehan Khatri
    April 4, 2016

    Brought tears! great work.

    Like

  3. soniritu470
    January 7, 2017

    Very nice

    Like

  4. Pawan Belala
    January 9, 2017

    अद्वितिय कलमकारी👍👌

    Like

  5. ritujasingh
    January 19, 2017

    बेहतरीन

    Like

  6. sapnaahirwar
    February 28, 2017

    Great work ☺

    Like

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This entry was posted on April 2, 2016 by in Hindi, Poetry and tagged .

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