Soulgasm

To Quill the Mocking World

और रावण का सर खो गया


सौम्या तिवारी

(5 मिनट)

02.RavanaCarriesSita

पंकज ने अपनी मोबाइल फ़ोन कॉल खत्म की, और एक दबंग मुस्कराहट लिए हवा में उछल गया. उसके उछलने के साथ ही ऊपर लटक रही बिजली की लड़ी झन्ना के ज़मीन पे गिर गयी, और गिरने के बाद भी अपनी लय में जलती बुझती रही. अपनी ख़ुशी में वो भूल गया था की उसने सर पे रावण के अनेकों सर वाला मुकुट पहन रखा है. इसका एहसास होते ही उसकी ख़ुशी दुगुनी हो गयी.

चमत्कारी दिन था आज. उसको अपने गाँव की रामलीला में रावण का रोल तो मिला ही था, साथ ही आज उसने मेघा जो की पास के दुसरे गाँव की थी, को अपने दिल की बात भी बता दी थी. मेघा रामलीला के तुरंत बाद उस से मिलने को राज़ी भी हो गयी थी. आज उसको वही ख़ुशी हो रही थी जो शायद रावण को सीता-हरण के बाद होती यदि उसपर परायी स्त्री को न छू पाने का श्राप न होता. खैर पंकज पर इस तरह की कोई पाबन्दी नहीं थी.  अपनी इसी ख़ुशी को अपने रावण के मुखौटों में तानकर वो रामलीला शो की तैयारी में लगे बाकी के दल के पास आया. उसके कमरे में दाखिल होते ही अपने आप को लाल रंग से पोत रही वानर सेना सन्नाटे में आ गयी. सारे वानर अपने मुखौटों के पीछे से, एक दुसरे की पूँछ उठाये,आधे रँगे शरीरों में उसकी ओर एकटक देख रहे थे. रामलीला में रावण का वध यदि राम की जगह गलती से जामवंत के बाण से हो जाता तो भी दृश्य इतना नाटकीय नहीं होता.

बात दरहसल ये थी की उसके मुकुट में केवल आठ ही सर थे. उसके खुद के सर को मिला कर पूरी गिनती नौ सरों की बनती थी. सच कहूँ, मुझे तो हमेशा से ही रावण का दस सर वाला रूप बेढंगा लगता था. ज़रा सोचिये आपके सर पे एक तरफ पाँच और दूसरी तरफ चार ही गोले लगे हों तो कैसा अनमना सा, अयोग्य सा, भद्दा सा लगेगा. और बात केवल लगने की ही नहीं है, भार का संतुलन भी तो सही नहीं बैठेगा, आप का सर हर वक़्त एक ओर को झुका ही रहेगा. मेरे अनुसार तो रावण के मरने में अवश्य ये असुंतलन भी काफी हद तक ज़िम्मेदार हो सकता था. जो भी हो, आज उसका दसवां सर ज़रूरी था क्यूंकि आज रावण संहार का दिन था और राम को रावण के दसों सर पर वार करने के बाद ही विभीषण के कहने पर उसकी नाभि पर वार करना था. तो बस खोज शुरू हो गयी. सारे वानर, पिशाच, देव, दानव, और मानव रावण के दसवें सर की खोज में लग गए. पुरे इलाके में बात फ़ैल गयी की रावण का दसवां सर खो गया है. अब अगर बड़ा शहर होता तो ये मामूली बात हो के रह जाती, पर ये दिल्ली से सटे NCR से सटे एक छोटे से गाँव में घटी घटना थी. लोग मज़ाक बनाने लगे की ये कैसा रावण है जिस से अपना एक सर भी नहीं संभाला जा रहा. कुछ लोग कयास लगाने लगी की उसका कौनसा सर खोया होगा, काम का, क्रोध का, लोभ, का, मत्स्य का आदि. सट्टे लगने लगे, बाजियां लगने लगी, सर खोज लाने पर इनाम तक की घोषणा हो गयी. परेशानी तब हुई जब बड़े- बूढ़े इसको कलयुग का प्रमाण बताने लगे, अब छोटे गाँव में बड़े-बूढ़ों की संख्या नौजवानों से अधिक ही होती है, क्यूंकि बच्चे अक्सर नौकरी की तलाश में माँ बाप को पीछे छोड़कर शेहेर निकल जाते हैं. जब रात तक खोज बीन करने पर भी दसवां सर नहीं मिला तो सरपंच इसको किसी आने वाली आपदा का करार कहने लगे, उनके अनुसार रावण ने स्वयं की मृत्यु से बचने का तरीका खोज लिया था. हर तरफ एक बेचैन सी, डरपोक सी सरसराहट फैलने लगी. पूजा पाठ आरम्भ हो गया. लोग सर ढूंढ लेने को और व्याकुल हो गए. इसी बीच किसी घर में हफ़्तों से बीमार, कुपोषित, 90  वर्षीय आदमी की मृत्यु हो गयी, जिसको सरपंचो ने मिल कर अकस्मात् मृत्यु करार दे दिया. इस से गाँव की अशांति को और हवा मिल गयी.

इतना कुछ चल ही रहा था की तभी गाँव के बाज़ार में खलबली मच गयी. सब क्या देखते हैं की मेघा रावण का दसवां सर लिए ख़ुशी ख़ुशी चली आ रही है. ये देखते ही रावण को याद हो आया की मेघा को अपने प्रेम का एहसास दिलाने के लिए बीते दिन उसने अपने दस में से एक सर की बलि दे देने का नाटक किया था. ये याद आते ही उसके नौ के नौ सर एक साथ चकरा गए. इधर दर्शक जो अब भीड़ में तब्दील हो गए थे मेघा पर कुलक्षणी होने का इलज़ाम लगाने लगे, उसको पुरे गाँव पर आपदा ले आने का ज़िम्मेदार मान लिया गया. बेचारी मेघा जो अपने पंकज से मिलने आ रही थी, को भीड़ ने घेर लिया और लज्जित करना आरम्भ कर दिया. एक तो दुसरे गाँव की और उसपे से उनके प्रिय रावण का सर लिए आ रही है. पंकज मेघा को देख दौड़ता हुआ आया, पर भीड़ को देख सकपका गया. इधर मेघा ने भी डरते डरते भीड़ को सारी कहानी बता दी. अब मामला पंकज पर आ गया. एक बूढ़े ने आगे बढ़ के पंकज के हाथ में पत्थर थमा दिया. संकेत साफ़ था, उसको फैसला करना था की वो किसका साथ दे. यदि मेघा को निर्दोष कह देता है तो भीड़ ज़रूर ही दोनों को साथ निकाल बाहर करेगी और अनैतिक करार दे देगी, यदि भीड़ का साथ देता है तो वो सबकी आँखों में निर्दोष तो साबित हो ही जाएगा शायद महान भी साबित हो जाये. और उसने झट से पत्थर मेघा की ओर फ़ेंक दिया.

शायद रामलीला में तो वो रावण बन गया था, पर असल ज़िन्दगी में वो हम सब लोगों की तरह राम ही था. एक आम आदमी, जिसको रावण का संहार करने के लिए विभीषण चाहिए. जो गैरों से तो मुस्कुरा के मिलता है, हमेशा वक़्त पर पहुँचता है पर अपनों को हमेशा “for  granted ” लेता है, जिसके निजी फैसले सही और गलत, सच और झूठ, अच्छाई और बुराई के बीच की जंग हो के रह जाते हैं और जिसके फैसलों का पडला हमेशा नीति, समाज और मर्यादा की ओर ही झुकता है. क्यूंकि यदि वो रावण होता तो अवश्य ही अपनी सीता को लेकर पूरी दुनिया से लड़ पड़ता. शायद अपनों के प्रति थोड़ा सा स्वार्थी होता.

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(Image: Sita Sings the Blues)

Somya Assorted

One comment on “और रावण का सर खो गया

  1. mriudulkhanduri
    October 22, 2015

    Wah..beautifully written, मुसीबत में साथ खड़े होने के लिए हिम्मत चाहिए जो सबके बस की बात नहीं।

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This entry was posted on October 22, 2015 by in Fiction, Hindi and tagged .

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